यह कहानी भी मेरी नहीं है – कही पढ़ी है ….
एक जहाज  समुद्र में डूब गया – उसमे से एक आदमी किसी तरह तैर कर एक छोटे से द्वीप पर पहुँच गया | वह इश्वर से प्रार्थने करता रहा की कोई उसे बचाने आये पर कुछ हुआ नहीं …
बेचारे ने किसी तरह लकड़ियाँ जोड़ कर धूप और बारिश से बचने के लिए एक छोटी सी झोपडी बना ली | लेकिन एक दिन वह जब खाने के लिए कुछ कुछ ढूंढ कर लौटा – तो उसकी झोपडी जल रही थी …. वह रो पड़ा और उसने इश्वर से कहा की तू मेरे साथ ऐसा कैसे कर सका?
जब अगले दिन की सुबह उसकी नींद खुली – तो एक जहाज की आवाज़ से – जो उसे बचाने आया था – 
उसने पूछा – तुम्हे कैसे पता चला की मैं यहाँ हूँ?
जवाब मिला – तुम्हारे धुंए के संकेत से …..
इसलिए – विश्वास रखो – कैसी भी परीक्षा की घडी क्यों न हो – उसे भगवान् का कोई संकेत समझो ….